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ब्लॉगवुड को विशाल करने का एक और यत्न
बनन बागन में बगरो बसंत है ------------- ललित शर्मा
वसंत के आते ही मौसम खुशनुमा हो जाता है, गुलाबी ठंड के साथ चारों ओर रंग बिरगें फ़ूलों की भरमार हो जाती है। खेतों में फ़ूली हुई पीली सरसों की आभा निराली हो जाती है लगता है कि धरती पीत वस्त्र धारण कर इठला रही है। रंग बिरंगी तितलियाँ फ़ूलों पर ... [read more]
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नवगीत: शीत से कँपती धरा --संजीव 'सलिल'
नवगीत: [read more]
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यूपी चुनाव के लेसन्स
उत्तर प्रदेश चुनाव की सरगर्मियाँ ज़ोर पकड़ रही हैं. इसके अभी तक के प्रचार और गतिविधियों से मुझे जो लेसन्स मिले हैं या सीख मिली हैं वो मैंने सोचा सबके साथ बाँटा जाए. [read more]
परदेश में किसी अपने को फूल भेजने हैं?
  अब इतना तो मालुम ही था कि इंटरनेटसे कहीं भी कुछ भी मंगा या या भेजा जा सकता है। पर अभी तक ऐसा मौका या सुयोग नहींमिल पाया था या यूं कह लें कि हासिल करने की कोशिश ही नहीं की थी। तो जब पिछलीशादी की सालगिरह पर दिल्ली से बच्चों द्वारा भेजा ... [read more]
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पटना के अशोक राजपथ से अग्निपथ तक का सफर
भोर होने में कुछ घंटे बाक़ी रहे होंगे। दरवाज़े के सांकल को चुपचाप लगाकर निकल गया था। गांधी मैदान की तरफ पैदल ही। फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने का जुनून टीवी और मल्टीप्लेक्स के आने के पहले सिनेमा संस्कृति का हिस्सा रहा है। टिकट खिड़की पर कता ... [read more]
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पीतल नगरी, पोलियो और पाकिस्तान [इस्पात नगरी से 54]
एक, दो, नहीं पूरे छः दशक लगे ग्लोबल विलेज में इस एक छोटी सी यात्रा को ... यात्रा अभी पूरी हुई या नहीं, यह पता लगने में अभी दो वर्ष और लगेंगे। तब तक ज़रूरी है एहतियात। खासकर पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और नाइजीरिया से। [read more]
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कृष्ण लीला .........भाग 35
जब कंस ने वत्सासुर का वध सुना [read more]
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झूलती मीनार और अलबेला खत्री ने मारी डुबकी --- ललित शर्मा
अगली सुबह अलबेला खत्री जी से बात हुई तो उन्होने बताया कि वे एक दिन पहले अहमदाबाद में ही थे। फ़िर उन्होने कहा कि अगले दिन मैं सुबह की गाड़ी से अहमदाबाद आ रहा हूँ। वहीं मुलाकात हो जाएगी। मैने कहा कि अहमबाद स्टेशन पर आपको गाड़ी तैयार मिलेगी। ... [read more]
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विकास के लिए तत्पर होता बिहार
देश के सबसे बीमार , पिछडे , अविकसित राज्य की फ़ेहरिस्त में सबसे पहला नाम बिहार का ही आता है । यही नहीं देश के सुदूर उत्तर पूर्वी राज्यों से लेकर राजधानी दिल्ली , मुंबई ,पंजाब और गुजरात के अलावा बंग्लौर जैसे आईटी हब बने शहरों में बिहार से ... [read more]
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अन्ना को नहीं दिखाई गई 'छन्नो​​'...खुशदीप
​बुधवार को पोस्ट लिखी थी...अन्ना, चमाटा और वीना मलिक...​ ​​ ​मंगलवार को अन्ना ने रालेगण सिद्धि में फिल्म गली गली चोर है देखने के बाद मीडिया से बात करते हुए चमाटे वाला बयान दिया था...मुझे ये जानने की बड़ी उत्सुकता थी कि जब अन्ना गांव क ... [read more]
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क्यों नहीं है जैव प्रौद्योगिकी नियामक प्राधिकरण?
देश में जीन संवर्धित (जेनेटिकली मोडिफाइड या जीएम) फसलों पर वर्षों से होने वाले शोध के नतीजे में अब तक सिर्फ एक ही प्रजाति बीटी कॉटन सामने आई है। सफल परिणाम यानी कम लागत पर अधिक उपज वाली इस तकनीक पर देश भर में सवाल उठते रहे हैं। बीटी बैं ... [read more]
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विजय शर्मा को पदमश्री
हिमाचल को पेंटिंग्स में पदमश्री अवार्ड से नवाजा गया है और यह पुरस्कार चंबा के विख्यात चित्रकार 50 वर्षीय भाषा अधिकारी विजय शर्मा को मिला है। श्री शर्मा जो कि भूरि सिंह संग्रहालय में कार्यरत हैं। इससे पहले विजय शर्मा को वर्ष 1990 में तत् ... [read more]
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विजय शर्मा को पदमश्री
हिमाचल को पेंटिंग्स में पदमश्री अवार्ड से नवाजा गया है और यह पुरस्कार चंबा के विख्यात चित्रकार 50 वर्षीय भाषा अधिकारी विजय शर्मा को मिला है। श्री शर्मा जो कि भूरि सिंह संग्रहालय में कार्यरत हैं। इससे पहले विजय शर्मा को वर्ष 1990 में तत् ... [read more]
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पाठकों की तलाश में हिन्दी ब्लाग जगत !
          हिन्दी ब्लागिंग की दुनिया भी अद्भुत है, यहां लगभग सभी विषयों पर लिखने वाले सिद्धहस्त लेखक व कवि विद्यमान है। हिन्दी ब्लाग आज खुब मात्रा में लिखे जा रहे हैं व उन पर कमेन्ट्स भी देखने को मिलते है, परन्तु यह भी कटु सत्य है कि जित ... [read more]
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आसमान में पत्थर रोज़ उछाला करते हैं
गूगल चित्र खोज इंजन से , साभार [read more]
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फिर कैसे अश्रुपूरित नेत्रों से स्वयं का दोहन करूँ?
नहीं हूँ मैं देशभक्त क्या करूँ देशभक्त बनकर जब रोज नए घोटाले करने हैं जब रोज जनता को  लूटना खसोटना है जब रोज भ्रष्टाचार के  नए नए मार्ग खोजने हैं जब रोज सच का गला घोंटना है जब रोज गणतंत्र के नाम पर सब्जबाग दिखाना है चेहरे पर ए ... [read more]
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कार्टून:- मुझसे नाराज़गी का सबब तो कहो...
http://kajalkumarcartoons.blogspot.com/ [read more]
किसकी है जनवरी, किसका अगस्त है! नागार्जुन
किसकी है जनवरी, किसका अगस्त है? कौन यहां सुखी है, कौन यहां मस्त है? सेठ है, शोषक है, नामी गला-काटू है गालियां भी सुनता है, भारी थूक-चाटू है चोर है, डाकू है, झूठा-मक्कार है कातिल है, छलिया है, लुच्चा-लबार है जैसे भी टिकट मिला, जहां ... [read more]
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वार्षिक संगीतमाला 2011 - पॉयदान संख्या 13 : दिल सँभल जा ज़रा, फिर मोहब्बत करने चला है तू...
वार्षिक संगीतमाला की अगली तीन पॉयदानों की खासियत है कि उन पर विराजमान गीत न केवल बेहद सुरीले हैं पर रूमानियत के अहसास से लबरेज भी। ये गीत ऐसे हैं जिनकी धुन अगर आप एक बार भी सुन लें तो उसे गुनगुनाने के लोभ से आप अपने आप को शायद ही ज्यादा ... [read more]
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गणतंत्र दिवस की शुभकानायें
गणतंत्र दिवस  26 जनवरी को मनाया जाता है, 26 जनवरी1950 को भारत का संविधान लागू हुआ| बस तभी से देश गणतंत्र हुआ और उसी उपलक्ष मे गणतंत्र दिवस हर वर्ष मनाया जाता है| जनवरी 26, 1950 भारतीय इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। भारत का ... [read more]
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फिज़ूलखर्ची की 26 जनवरी
आखिर गण की परेड का दिन आ गया। गण की आज छुट्टी है और तंत्र अपनी पूरी ताकत से इस दिन को सफल बनाने के लिए मुस्‍तैद है। वैसे सचमुच में जिसे परेड कहा जाता है, वह तो राष्‍ट्रपति भवन से शुरू होकर जनपथ, राजपथ से गुजरती हुई लालकिला पर पहुंच कर स ... [read more]
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भारतीय गणतन्त्र : राष्ट्रीय पर्व
भारतीय गणतन्त्र चिरायु हो  [read more]
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उतेलिया पैलेस: उसी हवेली के दाम लगने लगे --- ललित शर्मा
उतेलिया पैलेस का नाम सुनते ही हम तुरत-फ़ुरत उतेलिया की निकल पड़े। मैने सोचा कि राजस्थान के किलों या महलों जैसा ही कुछ होगा। उतेलिया गाँव के चौराहे पर पहुंच कर लोगों से पैलेस का रास्त पूछा। उतेलिया एक गाँव ही नजर आया। हमारे छत्तीसगढ के ग्र ... [read more]
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भारतीय गणतन्त्र चिरायु हो
भारतीय गणतन्त्र चिरायु हो  [read more]
अन्ना के दौर में धर्मेंद्र के 'सत्यप्रिय' की याद...खुशदीप​
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गीत: गाँव जी! कहें न शहर लुटेरा... --संजीव 'सलिल'
गीत: गाँव जी! कहें न शहर लुटेरा... संजीव 'सलिल' * मार समय की सहें मूक हो, कोई न तेरा-मेरा. पीर, वेदना, तन्हाई निश-दिन करती पग-फेरा.. गाँव जी! कहें न शहर लुटेरा... * तुमने वन-पर्वत खोये, मैंने खोया सुख-चैन. दर्द तुम्हारे दिल में ... [read more]
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गणतंत्र दिवस पर विशेष :    ...
गणतंत्र दिवस पर विशेष :           [read more]
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सरकार बनेगी थैलीशाहों की
उत्तर प्रदेश में विधान सभा के चुनाव में प्रथम चरण की शुरुवात हो चुकी है। कांग्रेस, सपा, बसपा, व भाजपा की ओर से बड़ी-बड़ी कंपनियों द्वारा आया रुपया ( ब्लैक मनी) मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिये खर्च किया जा रहा है। प्रिंट व इलेक् ... [read more]
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मेरा अस्तित्व ...
लम्हा लम्हा तुम जलती रहीं कतरा कतरा मैं पिघलता रहा [read more]
अनायास ही उमड़ आतीं हैं क्यूँ - कुछ स्मृतियाँ
दोस्तों  [read more]
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दुश्मन
दुश्मन [read more]
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देखा पापा टीवी पर विज्ञापन देखकर IDBI Life Childsurance Plan लेने का नतीजा, “लास्ट मूमेंट पर डेफ़िनेटली पैसा कम पड़ेगा”।
हाल ही में आप सभी लोग टीवी पर आई.डी.बी.आई. फ़ेडेरल जीवन बीमा कंपनी का बच्चों के जीवन बीमा का  एक विज्ञापन बहुत देख रहे होंगे “देखा पापा, ऐसा वैसा प्लॉन लोगे तो लास्ट मूमेंट पर पैसा कम पड़ सकता है” और फ़िर कहता है कि “आई.डी.बी.आई. लाईफ़ ... [read more]
कार्टून:- सिक्योरिटी की बड़ी सख़्त ज़रूरत है
http://kajalkumarcartoons.blogspot.com/ [read more]
हिमाचल प्रदेश का पूर्ण राज्‍यत्‍व दिवस
आज ही के दिन 1971 में हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्‍य का दर्जा प्राप्‍त हुआ था। हिमाचल प्रदेश का गठन 15 अप्रेल 1948 को हुआ था। 1 नवम्‍बर 1966 को कुछ और क्षैत्र प्रदेश में शामिल किए गए थे। सभी मित्रों को इस दिवस की अनेकानेक शुभकामनायें। [read more]
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रहिमन वे नर मर चुके...
स्मृति शिखर से... 4: [read more]
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मुर्दों के जीवित शहर लोथल (લોથલ) में एक दिन ---- ललित शर्मा
लोथल का आसमानी चित्र लोथल (લોથલ) ​का उत्खनित स्थल संग्रहालय से थोड़ी दूर पर ही है। मुख्यद्वार से प्रवेश करने पर सामने एक गोदी नुमा संरचना दिखाई दी। वहाँ से हम आगे बढ लिए, जिस बंदे से हमें मुलाकात करके इस बंदरगाह के विषय में जानना था वह ... [read more]
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अन्ना, चमाटा और वीना मलिक...खुशदीप​
 रालेगण सिद्धि में मंगलवार रात को निर्देशक रुमी जाफरी की नई फिल्म गली गली चोर है की अन्ना हज़ारे के लिए खास तौर पर स्क्रीनिंग की गई...भ्रष्टाचार पर बनी इस कामेडी फिल्म को गांव वालों के साथ देखने के बाद अन्ना हज़ारे ने मीडिया से भी बात क ... [read more]
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रचना-प्रतिरचना
रचना-प्रतिरचना [read more]
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सोनिया ने ही रचा इंदिरा गांधी की हत्या का षड्यंत्र- सुदर्शन
सोनिया ने ही रचा इंदिरा गांधी की हत्या का षड्यंत्र- सुदर्शन  [read more]
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" तुम मुझे खून दो , मैं तुम्हे आज़ादी दूँगा "
बादशाह खान और नेताजी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस हमारे देश के स्वाधीनता -संग्राम के अग्रणी , प्रभावशाली , लोकप्रिय और महान योद्धा थे | उनके प्रतिभावान व्यक्तित्व में जननेता , क्रांतिकारी तथा सेनानायक के गुणों का अदभुत संश्लेष्ण था | सत ... [read more]
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रायपुर से चला पत्र ग्यारह दिनों में भी दिल्ली नहीं पहुंचा
एक बात जानने की इच्छा है कि इस तरह की लापरवाही की शिकायत किसे और कहाँ की जाए, जिसकी सुनवाई हो सके। प्रतीक्षा रहेगी। [read more]
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रंगीनियों का शहर "पेरिस"
फ़्रांस की राजधानी पेरिस - द सिटी ऑफ़ लव, भव्यता, संम्पन्नता, ग्लेमर का पथप्रदर्शक.बाकी दुनिया से अलग एक शहर, जिसकी चकाचौंध के आगे सब कुछ फीका लगता है. लन्दन आने वाले हर व्यक्ति के  मन में सबसे पहले इस फैशन  की इस राजधानी को देख लेने की ... [read more]
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अंधी न्‍याय व्‍यवस्‍था अब बदली जाए
भारतीय न्‍याय प्रणाली कितनी कमजोर और अतर्कसंगत है, इसका आभास अक्‍सर होता रहता है. ज़रा इस ताजा केस पर गौर करें- [read more]
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कुछ तो जुस्तजू अभी बाकी है………………
तुम लिखते नही या मुझ तक पहुंचते नही तुम्हारे वो खत जिसकी भाषा ,लिपि और व्याकरण सब मुझ पर आकर सिमट जाता है शायद संदेशवाहक बदल गये हैं या कबूतर अब तुम्हारी मुंडेर पर नही बैठते या शायद तुमने दाना डालना बंद कर दिया है तभी बहेलियों क ... [read more]
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अकेला - कविता
(अनुराग शर्मा) [read more]
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लोथल (લોથલ) : हड़प्पा कालीन नगर -- भाग 1 --- ललित शर्मा
लोथल के प्रवेश द्वार पर विनोद गुप्ता जी और लेखक प्राथमिक पाठशाला में पढते थे तो एक पाठ सिंधुघाटी की सभ्यता पर था। पाठ के आलेख में मोहन जोदड़ो एवं हड़प्पा, से प्राप्त खिलौने में चक्के वाली चिड़िया, मुहर और पुरुष का रेखा चित्र भी था। साथ ही ... [read more]
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​दरबार साहिब पर टिप्पणी हर भारतीय का अपमान...खुशदीप
विदेशों में कुछ ​टीवी-रेडियो प्रेजेंटर्स के लिए भारत और यहां के लोगों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करना शायद शगल बन गया है...कुछ महीने पहले न्यूज़ीलैंड में एक प्रेजेंटर ने दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित में दीक्षित की स्पैलिंग को त ... [read more]
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प्रेम और सुभाषचन्द्र बोस: An Indian Pilgrim ...Ich denke immer an Sie
सुभाषचन्द्र बसु ( टोकियो, नवम्बर 1943) भारत में कुछ नायकों को लोग न मृत्यु बदा होने देते हैं और न प्रेम। [read more]
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मनरेगा: क्या अभिशाप है?
नरमे कपास की चुगाई के ठण्डे मौसम में मजदूरों की किल्लत और बढ़ती चुगाई लागत के बारे में सोचकर ही किसान को पसीना आने लगता है। इसका एक मुख्य कारण माना गया है महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को। ऐसा नहीं है कि य ... [read more]
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"हिन्दी सीखो और प्रांतीयता का त्याग करो" : बंगालियों को सुभाष चन्द्र बोस की सलाह
 "हिन्दी सीखो और प्रांतीयता का त्याग करो" [read more]
इसपे भी सोचे तानाशाही बनाम आम जनता का जनतंत्र
तंत्र के माने है शक्ति |शक्ति के माने है अधिकार | स्पष्ट बात है कि जनतंत्र का सीधा - सपाट मतलब है , जनता की शक्ति या जनता का अधिकार | समस्त जनता की कमोवेश बराबरी की शक्ति व अधिकार | जनतंत्र की विरोधी शब्द या अवधारणा का नाम है 'तानाश ... [read more]
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नर्व वर्ष पर यमुनानगर में प्रदर्शन
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दर्द । ( गीत )
दर्द । ( गीत ) [read more]
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वो न आए उनकी याद वफ़ा कर गई ...
वो न आए उनकी याद वफ़ा कर गई, उनसे मिलने की चाह सुकून तबाह कर गई, आहट दरवाज़े की हुई तो उठकर देखा, मज़ाक हमसे हवा कर गई ! [read more]
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वार्षिक संगीतमाला 2011 - पॉयदान संख्या 14 : शीत लहर है,भीगे से पर हैं, थोड़ी सी धूप माँगी है...
वार्षिक संगीतमाला के दो हफ्तों का सफ़र पूरा करके हम आ पहुँचे हैं चौदहवीं पॉयदान पर जहाँ पर गीत है पिछले महिने ही प्रदर्शित हुई फिल्म 'लंका' का। गीत की गायिका हैं एक बार फिर श्रेया घोषाल। पर आज मैं बात करूँगा इस नग्मे की नवोदित युवा गीतक ... [read more]
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त्वरितर के अनुचर- मीडिया बनते शोहरतमंद
जब बरखा दत्त को साढ़े चार लाख से अधिक और राजदीप सरदेसाई को पौने चार लाख से ज्यादा लोग ट्वीटर पर फॉलो कर रहे हों तो क्या आप इस सवाल से टकराना चाहेंगे कि व्यक्तिगत फॉलोअरों की संख्या ख़बरों की दुनिया की मान्यताओं को कैसे बदल रही है? क्या ... [read more]
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ऐसा ही बचा हुआ गाँव है
ऐसा ही बचा हुआ गाँव है श्यामनारायण मिश्र [read more]
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साबरमती, चरखा और ट्रैफ़िक ----- ललित शर्मा
सुबह उठा, तो देखा कबूतर अकेला था। प्रेम चोपड़ा के डर से कबूतरी नहीं आई। आज नामदेव जी की वापसी थी, वापसी की टिकिट हम दोनों की साथ ही थी पर मुझे तो अभी और घुमना था। सुबह कार्यक्रम बना कि साबरमती आश्रम चला जाए फ़िर वहीं से नामदेव जी को भोजन ... [read more]
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कुछ काम भी तो नहीं करती !
कुछ जरुरी काम हैं , बहुत जरुरी काम हैं ना जाने कितने समारोह छोड़ दिए थे मैंने यही कह कहकर कि काम है बहनों की शादी हो या भाइयो की सगाई बस एक दिन पहले ही पहुंच पाती हूँ कैसे पहुँचती काम ही जो इतना होता हैं कई बार मन करता हैं , सखिय ... [read more]
क्या कभी मिटेगी गरीबी
अभी हाल ही में आई दो खबरों ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा । पहली ये कि एक गरीब व्यक्ति जिसे उसकी पत्नी को जच्चगी के लिए अस्पताल में दाखिला नहीं मिला ने पूरी रात सडक पर अपनी मृत पत्नी व बच्चे की लाश के साथ बिताई । दूसरी ये कि न्यायपालिका ने ... [read more]
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एक न्यायपूर्ण दुनिया के अस्तित्व में आने की राह में सबसे बड़ी बाधा हैं 'कर्मफल' व 'फैसले' की धार्मिक अवधारणायें !!!
. . . [read more]
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जनता की अदालत में मीडिया ‘तय करो किस ओर हो तुम ’
उत्तर प्रदेश के चुनाव में जहां जनता की अदालत में जन प्रतिनिधि हैं, वहीं 22 जनवरी को लखनऊ में एक और अदालत लगी। इस अदालत का आयोजन अलग दुनिया ने वाल्मीकि रंगशाला में किया था। इसमें लेखक, पत्रकार, संपादक, बुद्धिजीवी, जन संगठनों के कार्यकर्त ... [read more]
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कृष्ण लीला .........भाग 34
 कान्हा की वर्षगांठ का दिन था आया नन्द बाबा ने खूब उत्सव था मनाया  [read more]
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टीम अन्ना को आपके जूतों की जरूरत नहीं!!
Cartoon by Kirtish Bhatt (www.bamulahija.com) [read more]
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मानो या ना मानो
आभार: http://1x.com/photos/conceptual/31526/ [read more]
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कार्टून :- फिर रेल चली
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ना जानें क्यों....
ना जाने क्यों ....उदास हो गई रातें मेरी। [read more]
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फ़ेसबुकिया कबूतरी की गुड मार्निंग -- ललित शर्मा
अहमदाबाद का सुबह का नजारा सुबह साढे 5 बजे आँख खुली तो खिड़की से अंधेरा नजर आ रहा था। तब समझ आया कि यहाँ हमारे छत्तीसगढ की अपेक्षा दिन देर से निकलता है। खिड़की से नीचे झांक कर देखा तो स्ट्रीट लाईट जल रही थी। सुनसान सड़क शंहशाह की सवारी गुज ... [read more]
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साहित्यकार ऐसे होते हैं तो हम ब्लॉगर ही भले...खुशदीप
बॉलीवुड का एक बात के लिए मैं बहुत सम्मान करता हूं कि यहां एक दूसरे को कभी मज़हब के चश्मे से नहीं देखा जाता...सब एक दूसरे से घी-शक्कर की तरह ऐसे घुले-मिले हैं कि कोई एक दूसरे को अलग कर देखने की सोच भी नहीं सकता...बल्कि जब भी देश की एकता ... [read more]
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हास्य कुंडली: --संजीव 'सलिल'
हास्य कुंडली [read more]
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रूपम-रेनू परिणय : रजत जयंती पर
ॐ  [read more]
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बिहार की लिट्ठी ऑन व्हील्स बैंगलोर में (Littionwheels.com in Bangalore)
पिछले ४ दिनों से यहीं घर के पास एक नई प्रकार की खाने की चीज दिखी जो कि दक्षिण भारत की नहीं थी, यह थी बिहार की लिट्ठी चोखा। दाम भी कम और चीज भी बेहतरीन, लिट्ठी हमने पहली बार पटना में फ़्रेजर रोड पर कहीं खाई थी, हमें तो वही स्वाद लगा। अब ... [read more]
तिरंगा कहाँ छूट गया
इस आशा में कि फिर हर भारतवासी के दिल में देशभक्ति का समुद्र हिलोरें लेगा। आप सब को २६ जनवरी की ढेरों शुभकामनाएं। जय हिंद। [read more]
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खुदरा व्यापार में विदेशी कम्पनियों के आगमन के माने मतलब- प्रचारित और वास्तविकता
3 दिसम्बर के दैनिक जागरण में कृषि क्षेत्र के ज्ञाता लेखक देविन्दार शर्मा ने खुदराव्यापार में विदेशी कम्पनियों को छूट दीये जाने के बारे में किए जाते रहे प्रचारों के जबाब में कुछ तथ्यों व आकंड़ो को पेश किया है | उसे हम यहा आपके समक्ष ... [read more]
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उमा भारती रोज़गार की तलाश में !!
Cartoon by Kirtish Bhatt (www.bamulahija.com) [read more]
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एक कदम विकास की ओर
किसी ने बहुत अदभुत कहा है, आप दूसरों के साथ उस तरह का व्‍यवहार करें, जो आप चाहते हैं कि वह आपके साथ करें। इस नियम का जिस व्‍यक्‍ित ने भी अनुशरण किया, वह एक महान नेता बनकर उभरा है। और याद रहे कि महान नेता जनमत तैयार करते हैं, वो जनमत का ... [read more]
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साक्षात्कार ... माधवी शर्मा गुलेरी जी से ... --लावण्य शाह
साक्षात्कार  ...   [read more]
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मैं सन्‌ ३६ की दिल्ली में - राजेन्द्र उपाध्याय
मेरी मनपसंद कविता: [read more]
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कालजयी रचना: विप्लव गायन --बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'
कालजयी रचना: [read more]
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अक्षरधाम मंदिर और फ़ोटो की दूकान --- ललित शर्मा
स्वामी नारायण संप्रदाय द्वारा संचालित कॉलेजगुजरात की राजधानी गांधी नगर में प्रवेश करने पर कीकर के पेड ही दिखाई दिए। हमारा उद्धेश्य था स्वामी नारायण सम्प्रदाय के अक्षरधाम मंदिर को देखना। हम 4 बजे मंदिर के सामने थे। मंदिर पहुंचने पर जिग्न ... [read more]
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छेड़ो कोई तराना के खामोश अब तो रात है--गज़ल
छेड़ो कोई तराना के खामोश अब तो रात है हम आज ही क्योँ हैं उदास कोई तो फ़िर बात है [read more]
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गुड़ से महंगे गुलगुले
एक खबर के अनुसार घरेलू और निर्यात मांग में कमी तथा भारी कर्ज के बोझ तले दबे कपड़ा उद्योग को 2011 के दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। साल की शुरूआत ही मुश्किलों से हुई, जनवरी में कपास की कीमत घरेलू बाजार में 65,000 रुपये प्रति क ... [read more]
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अब तो नदी के सूखने की संभावना ही नहीं है: महफूज़ (Mahfooz)
मुझे पता नहीं क्यूँ कविता करने से बहुत डर लगता है..... एक तो यह कि कोई पढ़ता नहीं है और जो पढ़ भी लेता है तो वो अपना दिमाग लगा कर उसके मतलब में अपने हिसाब से एनालिसिस कर उस कविता को तहस नहस कर देता है और फ़िर ऊपर से मेरे जैसे को हिंदी ड ... [read more]
वार्षिक संगीतमाला 2011 - पॉयदान संख्या 15 : क्या आपको भी अपने दिल पे शक़ है ?
पिछले साल एक फिल्म आई थी इश्क़िया जिसका गीत दिल तो बच्चा है जी.. वार्षिक संगीतमाला का सरताज गीत बना था। निर्देशक मधुर भंडारकर को गीत का मुखड़ा इतना पसंद आया कि उन्होंने इसी नाम से एक फिल्म बना डाली। फिल्म तो मुझे ठीक ठाक लगी, पर खास लगा ... [read more]
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साहित्य कला का अद्वभुत संगम
साहित्य कला का अद्वभुत संगम  दीपक शर्मा 'कुल्लुवी' (सिटिजन जर्नलिस्ट) 'जर्नलिस्ट टुडे नेटवर्क [read more]
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शॉपिंग के बीच में क्रिकेट?
Cartoon by Kirtish Bhatt (www.bamulahija.com) [read more]
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स्त्री मुक्ति को नया अर्थ दिया
आज एक ख्याल ने जन्म लिया स्त्री मुक्ति को नया अर्थ दिया [read more]
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मुक्तिका : पूछ रहे तुम --संजीव 'सलिल'
मुक्तिका : [read more]
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नवगीत: शीत से कँपती धरा --संजीव 'सलिल'
नवगीत: [read more]
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सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर न रोक, न ठोक - बस जरा सी टोक
http://www.facebook.com/avinashvachaspati एक ऐसी आजादी जो अराजकता बनती जा रही है जबकि चंद विवेकहीन लोग ही इसके लिए जिम्‍मेदार हैं। मेरा तो यह कहना है फेसबुक को सेफबुक बनाने के या अन्‍य ऐसी साइट्स के जरिए अभिव्‍यक्ति की आजादी के नाम पर ... [read more]
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अदभुत शिल्पकारी : रुड़ा बाई नी बाव -રુદ઼ા બાઈ ની બાવ​ -- ललित शर्मा
अड़ालज का रास्ता मारुतिनंदन रेस्टोरेंट से भोजन करके गांधीनगर मार्ग पर बढते हैं, इस मार्ग पर आगे चल कर बाएं हाथ को अड़ालज लिखा हुआ एक बोर्ड लगा है। हमारी गाड़ी यहीं से एक गोल चक्कर लेती है और अड़ालज की ओर बढ जाती है। बावड़ियाँ तो बहुत द ... [read more]
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पूँजीवादी व्यवस्था को मुख्य खतरा वामपंथ से है: कामरेड अशोक-2
प्रश्न: उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश की राजनीति को आपने बहुत पास से देखा है। क्या वजह है कि हिंदी क्षेत्र में वामपंथी आंदोलन कभी कोई खास असर नहीं छोड़ पाया। या यों कहें जो कुछ हासिल भी था वह भी हाथ से निकल गया। ऐसा क्यों? [read more]
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अब रंग-बिरंगी कपास
कपास की तरह सफेद का मुहावरा अब बदल कर रंग-बिरंगा होने जा रहा है। अब वह दिन दूर नहीं कि जब कपास हरी, भूरी, बैंगनी और न जाने कौन-कौन से रंग की हो जाएगी। देश में कर्नाटक के धारवाड़ में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंसिज (यूएएस) और तमि ... [read more]
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कामनाओं की समाप्ति नहीं केवल सहजता से नियंत्रण(संयम) ही संभव है
कुँवरानी निशा कँवर नरुका एक पुरानी कहावत है कि नाग को पिटारी में बंद कर देने से उसका जहर दूर नहीं होसकता! अर्थात जोर जबरदस्ती से अपनी इच्छाओं का दमन करने से इच्छाएं और अधिक विकराल रूप लेलेती है ,जिन्हें हम कुंठाएं भी कहते है| इसलिए जो ... [read more]
पुन: कब ...
भूमि से नीचे बहुत, कहीं बहुत गहरे है एक आसमान [read more]
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हम हार पचा नहीं पाते, पर क्यूँ?
इधर खेल की नकेल उसके अफरात आमदनी की गुंजाईश के कारण खेल का 'ख' न समझाने वालों के हाथ चली गयी है, जिन्हें सिर्फ और सिर्फ आमदनी से मतलब है। खिलाड़ी बंधुआ मजदूर हो गए हैं और ऐसे मजदूरों से "क्वालिटी" की आशा करना कहाँ की बुद्धिमानी है। [read more]
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चेतन भगत-रिवोल्यूशन 2020 विद सेक्स...खुशदीप ​
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डोंट वरी!! ...ईवीएम से छेड़छाड़ संभव है.
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दर्द
 ... कुछ रोज पहले ही जिया था मैंने तुझको अपनी साँसों को कर दिया था नाम तेरे मेरा दिल धड़कने लगा था तेरी ही धड़कनों से कर ही दिए थे बन्द सभी दर-ओ-दीवार बेजारी के बस तेरी ही महक से कर लिया था सरोबार वजूद अपना । जिस्म से उठती थी ... [read more]
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अपनी उम्र को तो शायद तूने तिजोरी में बंद कर रखा है ...........
ये कैसा चलन आया ज़माने का सुनता है घुटती हुई चीखें  [read more]
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आई.टी. वालों का दर्द उनकी ही जबानी..वी नीड यू वेरी अर्जेंटली टैल मी व्हेन यू कैन ज्वॉईन… (Pain of IT guys.. by there own..)
शाम को बस में बैठते लोगों की दिन भर की भड़ास सुनने को मिलती है, अगर दो लोग हैं तो आपस में चिकिर चिकिर और और अगर अकेला है तो फ़ोन पर या फ़िर मन ही मन में पर भड़ास तो निकलती ही रहती है। [read more]
पूंजीवादी व्यवस्था को मुख्य खतरा वामपंथ से है : कामरेड अशोक
कृपया फोटो पर क्लिक कर के पढ़ें [read more]
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हमारे संविधान निर्माताओं द्वारा प्रस्तावित एक उच्च लोकतांत्रिक आदर्श व लक्ष्य है 'धर्मनिरपेक्षता'... छोटे दिल, मोटी अकल व खोटी सोच रखने वालों की समझ से परे है यह...
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पूँजीवादी व्यवस्था को मुख्य खतरा वामपंथ से है: कामरेड अशोक
प्रश्न: 2009 के लोकसभा चुनावों में हार और फिर बंगाल की पराजय के बाद क्या मान लिया जाए कि भारत में वामपंथ अब अपनी उपयोगिता और प्रासंगिकता खो चुका है? [read more]
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लगाव: लगाव: जैसे ही कदम बढ़ाते हैं
नयी उमंगें नया जोश  नए साल में नयी बहार नयी उमंग भरता है इस बहार में [read more]
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लगाव: खो जाते हैं
भीड़ में कहीं खो जाते हैं हर बार  भटक जाते हैं अनेक दिशाओं की ओर [read more]
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अतीत हमें वर्तमान में जीने नहीं देता
जिस किसी भी व्‍यक्ति के पास या देश के पास अपना अतीत नहीं होता वह वर्तमान में ही जीता है और भविष्‍य की कल्‍पना करता है लेकिन जिसके पास अतीत होता है वह अतीत में ही डूबा रहता है। वह वर्तमान में भी नहीं जी पाता और ना ही अपना भविष्‍य बना पात ... [read more]
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पत्थर और आदमी
पत्थर और आदमी में [read more]
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पानी में अपने भी जहाज़ चला करते थे...खुशदीप
कहां गई वो बचपन की अमीरी हमारी, जब पानी में अपने भी जहाज़ चला करते थे ------------------------------------- [read more]
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कृष्ण लीला ........भाग 33
इक दिन फल बेचने वाली आई है जन्म -जन्म की आस में मोहन को आवाज़ लगायी है अरे कोई फल ले लो आवाज़ लगाती फिरती है मगर आज ना टोकरा खाली हुआ एक भी फल ना उसका बिका रोज का उसका नित्य कर्म था प्रभु दरस की लालसा में  नन्द द्वार पर आवाज़ ल ... [read more]
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और हम चीन को पछाड़ देंगे.
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रंगीलो राजस्थान चित्तौड़गढ़ : जयमल का शौर्य और पद्मिनी की त्रासदी !
पिछली पोस्ट और इस पोस्ट का अंतराल एक महिने से ज्यादा हो गया है। इसकी वज़ह एक शाम मेरे नाम पर चल रही वार्षिक संगीतमाला है जिसे आप तक पहुँचाने की तैयारी काफी समय माँगती है। नतीजन राजस्थान पर चल रहे यात्रा वृत्तंत को बीच में ही विराम देना ... [read more]
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कितने सवाल हैं लाजवाब?
हर सवाल लाजवाबभारत एक महान राष्ट्र है। यहाँ का हर व्यक्ति महान है। हर कोई देश-सेवा, भाषा-सेवा, जाति-सेवा, धर्म-सेवा, ये सेवा, वो सेवा आदि के बोझ से कुचला जा रहा है। लेकिन देश है कि फिर भी समस्याओं से घिरा है। दहेज और रिश्वत जैसी परम्परा ... [read more]
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वार्षिक संगीतमाला 2011 - पॉयदान संख्या 16 : तेरे वास्ते मेरा इश्क़ सूफ़ियाना...
वार्षिक संगीतमाला की सोलहवीं पॉयदान पर स्वागत कीजिए जी सा रे गा मा पा के 2010 के विजेता कमल खान का जिन्होंने दि डर्टी पिक्चर में आए अपने इस गीत से खासी लोकप्रियता अर्जित की है। अगर आपने सा रे गा मा पा पिछले साल देखा हो तो आप भली भांति ज ... [read more]
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'रियेल्टी शोज' जो सबसे ज्यादा अनरियल होते हैं।
आज जिन्हें रियेल्टी शोज कहकर परोसा जा रहा है वास्तव में वही सब से ज्यादा अनरियल होते हैं। हालांकि शुरुआत कुछ अच्छे, सार्थक, मनोरंजक और ज्ञानवर्धक सीरियलों से हुई थी, जैसे बोर्नविटा क्विज या अंताक्षरी जैसे शोज। पर फिर टी.वी. पट गया निर्र ... [read more]
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माध्यम बनी क्या आज नारी ....?
कुटिल            नीतिज्ञों                के   हृदय            कितने       मलिन    हैं  स्वयं        हैं           षड्यंत्र       रचते  फांसते        निरी         नार          हैं. [read more]
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हे महाकाल! भ्रष्टाचारियों ने उज्जैन को बदनाम करके रख दिया ।
पिछले कुछ समय से उज्जैन का नाम लगातार समाचार चैनल में देख रहे होंगे वो भी धार्मिक नगरी के तौर पर नहीं, भ्रष्टाचारियों को पकड़ने को लेकर। नगरनिगम के चपरासी से क्लर्क तक से १० करोड़ से ज्यादा की संपत्ती की बरामदगी हुई है और संख्या ५०-६० करो ... [read more]
कार्टून:- रूश्-दी पर क्यों कोलावरी डी ... !!!
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दोहा सलिला: यथा नाम गुण हों तथा -- संजीव 'सलिल'
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बीटी कपास के दस वर्ष
कपास की खेती मानव सभ्यता के इतिहास में सात हजार सालों से होती आई है, लेकिन इसमें पिछली सदी के अंतिम दशक में एक नया अध्याय तब लिखा गया जब महाराष्ट्र स्थित माहिको हायब्रिड सीड कंपनी और अमेरिकन कंपनी मोनसेंटो से साझेदारी की। सन 1999 में मो ... [read more]
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स्मृति शिखर से… 3 : गोली बंदूक कुछ नहीं समझता है।
- करण समस्तीपुरी "छौंरी पतरकी गे........ गोरिया खेतबा के आरी.... काहे मारे गजब पिहकारी.... !!" गौर-वर्ण, सुपुष्ट शरीर, जटा-जुटित मस्तक, हाथ मे डिबिया लिए, तुतली आवाज में यही गीत गाते घर से बथान पर जाते हुए जटा झा के प्रति पता नहीं कैसे ... [read more]
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पूंजीवादी व्यवस्था को मुख्य खतरा वामपंथ से है : कामरेड अशोक
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दोहा सलिला: समय संग दोहा कहे... --संजीव 'सलिल'
दोहा सलिला [read more]
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एक कविता: समय सलिला के किनारे ---संजीव 'सलिल'
एक कविता: संजीव 'सलिल' * समय सलिला के किनारे श्वास-पाखी ताक में है. आस मछली मोहती मन. कभे इजती फिसल ज्यों संध्या गयी ढल. कभी मछली पकड़ लगता सार्थक पल. केंकड़ा संकट लगाये घात. फेंकता है जाल [read more]
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अहम या इमानदारी ...
जबकि मुझे लगता है हमारी मंजिल एक थी मैं आज भी नही जान सका क्यों हमारा संवाद वाद विवाद की सीमाएं लांघ कर मौन में तब्दील हो गया [read more]
मुझे उस एक रोज की तलाश है.............
काश ऐसा एक रोज़ हर किसी की ज़िन्दगी मे आये [read more]
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हाथी को पैक करने की कीमत!
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गीत विरह के *****(दीपक शर्मा 'कुल्लुवी')*****
गीत विरह के [read more]
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An article in jansatta
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Subject: Clever ideas to make life easier Clever Ideas to Make Life Easier
Subject:  Clever ideas to make life easier [read more]
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सिर्फ़ दो पंक्तियां
खाक कर देती है सियासत को , जब अवाम ,एक बार इस पर आमादा होती है , तुम्हें यकीन हो न हो , जाम में पैदल आदमी की रफ़्तार सबसे ज़ियादा होती है  [read more]
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"हुं छुं अमदाबाद" હું છું અમદાબાદ​ --- ललित शर्मा
चौधरी की चाय, चौधरी की चाय के शोर के साथ आँख खुली। आँख बंद किए किए ही चाय का आर्डर दिया। महाराज भी उठ चुके थे, उन्होने एक चाय मुझे थमाई और एक चाय खुद थामी। 5 रुपये में चाय उम्दा थी, लेकिन कप छोटा था, महाराज ने चाय वाले से दुबारा कप में ... [read more]
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शादी पर लेना होगा अब आठवां वचन भी...खुशदीप
सरकारें हमेशा बुरा ही काम नहीं करती...कभी-कभार भूले-बिसरे अच्छा काम भी कर लेती हैं...राजधानी दिल्ली की सरकार ने ऐसा ही एक कदम उठाया है...एक ऐसी अनूठी मुहिम शुरू की है, जिसका समाज पर बहुत अच्छा असर पड़ सकता है...खास कर उन युवक-युवतियों प ... [read more]
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टीम इंडिया की प्लानिंग.
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बेहतर हो सडक प्रबंधन
दिल्ली का एक छोटा जाम [read more]
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मार्क्सवाद और नई चुनौतियाँ-3
पितृसत्ता- [read more]
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टीएमसी सम्भला नहीं, और चाहिए टैक्सटाइल पार्क
विगत दिनों गंगानगर के व्यापारी और उद्योगपति एकजुट हो कर क्षेत्र के लिए टैक्सटाइल पार्क की मांग कर रहे थे। राज्य और केंद्र सरकार को बहुत सारी संस्थाओं ने पत्र भी लिखे। उसी समय एक सरकारी योजना के बारे में जानकारी मिली- कपास प्रौद्योगिकी म ... [read more]
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( डी0 के0 न्यूज़ )-7 ....16 -01 -2012 .
( डी0 के0 न्यूज़ )-7 16 -01 -2012 . मेरा डी0 के0 न्यूज़ मतलब दीपक 'कुल्लुवी' न्यूज़ आपको आपकी ही खबरों की मुरम्मत करके रंग बिरंगी खबरें सुनाता है आप भी सुनें और लुत्फ़ उठाएँ I [read more]
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वार्षिक संगीतमाला 2011 - पॉयदान संख्या 17 : जानिए अमित जी का हाल - ए - दिल !
अमिताभ बच्चन के अभिनय का तो हम सभी लोहा मानते हैं। उनके धारदार अभिनय को दर्शकों के दिल में बसाने में उनकी आवाज़ का बहुत बड़ा हाथ है। बचपन मे फिल्मों के प्रोमो रेडिओ पर आते थे 'प्रायोजित कार्यक्रम' के नाम से। अगर फिल्म अमित जी की हो तो कह ... [read more]
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फेसबुक पर मानसिक जंग की कुछ चुनिंदा शब्‍द तस्‍वीरें और अन्‍नास्‍वामी प्रवचन माला को 'फेसबुक महात्‍म्‍य' शीर्षक से पुस्‍तक रूप में प्रकाशित किया जा रहा है
गरीब का भूखा पेट और उसमें से रिसती आंतडि़यों की चरमराहट  के रुदन को सुन वोट-पिपासु सक्रिय हो उठे और जोर से खिलखिलाए कुटिल हंसी [read more]
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जिसे दिल-ओ-जान से चाहा, उ ...
जिसे दिल-ओ-जान से चाहा, उसे अपना न बना पाया, अब पूछ रहा है वीराना, क्या पाया बनके दीवाना ? [read more]
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शायद तभी पक्के सौदे घाटे के नही होते……
उम्र की दराज खोलकर जो देखी उम्र ही वहाँ जमींदोज़ मिली सिर्फ़ एक लम्हा था रुका हुआ जिसके सीने मे था कैद ज़िन्दगी का वो सफ़ा  जहाँ मोहब्बत ने मोहब्बत को  जीया था कुछ लम्हा उसके बाद ना उसके पहले उम्र का ना कोई निशाँ मिला ये हुआ सौ ... [read more]
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Annual Function of Himachal Mittar Mandal (Press reporter:Deepak Sharma 'Kuluvi')
Annual Function of Himachal Mittar Mandal [read more]
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किताबों की दुनिया - 65
पहले की बात है मैंने एक शेर कहा था : संजीदगी, वाबस्तगी, शाइस्तगी, खुद-आगही आसूदगी, इंसानियत, जिसमें नहीं, क्या आदमी (वाबस्तगी: सम्बन्ध, लगाव, शाइस्तगी: सभ्यता, खुद-आगही: आत्मज्ञान, आसूदगी:संतोष) [read more]
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लौट आए फिर सुए
लौट आए फिर सुए [read more]
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चाबी वाला पत्थर और कस्तूरी की खुश्बू लिए चले गुजरात की ओर ---- ललित शर्मा
कई महीनों से गुजरात यात्रा करने विचार था लेकिन कोई न कोई अवरोध यात्रा में उत्पन्न होने के कारण जाना नहीं हो पा रहा था। पिछले 14 दिसम्बर को मित्र नामदेव जी ने गुजरात जाने की बात कही और मैं सहर्ष तैयार हो गया। अभी नवम्बर में ही हमने एक लम ... [read more]
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पिछले दिनों प्रकाशित कुछ आलेख
पिछले दिनों ,डाक से प्राप्त हुए कुछ प्रकाशित आलेख ।आलेखों को पढने के लिए छवि के ऊपर चटका भर लगा दें । आलेख अलग खिडकी में बडे होकर खुल जाएंगे जिन्हें सुविधानुसार पढा जा सकता है । [read more]
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पोलिथीन के रूपये फ़ट से डेबिट और बैग के देने में आनाकानी
आजकल बड़े बाजारों से ही खरीदारी की जाती है, फ़ायदा यह होता है कि हरेक चीज मिल जाती है और लगभग हरेक ब्रांड की चीजें मिल जाती हैं, तो अपनी पसंद से ले सकते हैं, चीजों को हाथ में लेकर देख सकते हैं। जबकि किराने की दुकान पर चीजों को बोलकर लेना ... [read more]
मार्क्सवाद और नई चुनौतियाँ-2
माध्यम साम्राज्यवाद- [read more]
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दिल्ली टू मधुबनी ..वाया मोबाइल
जब से जेब में मोबाइल आया है , और कुछ हो न हो , फ़ोटो खींचने की शौक एक आदत सी बन गई है , और जो फ़ोटुएं निकल कर आती हैं तो हम भी खुश हो लेते हैं कि चलो ससुरा नेगेटिव तो नहीं निकल के आया । आप शायद यकीन न करें मैं अपने मोबाइल से लगभग छ हज़ार फ़ ... [read more]
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मूर्तियों में जड़ मत करो विवेकानंद को
गौरव की मुद्रा में शांत भाव से बाजूबंद किये सामने देखते हुए विवेकानंद की मूर्तियां और तस्वीरों को किसने नहीं देखा होगा। इन मूर्तियों में ढाले गए विवेकानंद दुर्लभ साहस के प्रतीक बना दिये गए हैं। मूर्तियों की ऊंचाई ने विवेकानंद से हमारी द ... [read more]
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पाकिस्तान में पतंगबाजी!
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कार्टून:- पाकिस्तान में हुर्रे हुर्रे
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तुम्हारा हर दिन जन्मदिन सा गुजरता रहे
चिड़ियाएं तो चिड़ियाएं ही होती हैं आँगन में फुदकती हैं कभी मुंडेर पर  तो कभी छज्जे पर कभी पानी की बाल्टी पर तो कभी आँगन में पड़े दानों पर फुदकती हैं , चहचहाती हैं  बेफिक्री से कैसे बतियाती हैं ना डर ना खौफ ना कोई चाहत बस एक पुर ... [read more]
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कोई तुम्हें हांकता है गधे की तरह
प्रमोशन की आस में तुम्हारी हड्डियां जर्जर होने लगीं हैं जमीर खंडहर, दिन ख़राब दिल की धमनियों में मौसम नहीं दफ़्तर धड़कता है कोई तुम्हें हांकता है गधे की तरह बनाता है काबिल एक और गदहे की तरह ताकि तय हो सके तुम्हारे दुखों की मंज़िल ... [read more]
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अहमद फ़राज़ की कल्पनाओं की उड़ान : सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं !
आज अगर अहमद फ़राज़ हमारे साथ होते तो हम सब उनका 81 वाँ जन्मदिन मना रहे होते। फ़राज़ भले नहीं रहे पर उनकी शायरी के तेवर हमेशा याद आते रहे हैं। फ़राज़ को याद करते हुए उनकी एक लंबी पर  बेहद मशहूर ग़ज़ल याद आ रही है जिसे मुशायरों में वो बड़ा ... [read more]
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मार्क्सवाद और नई चुनौतियाँ-1
इंटरनेट आने के बाद पुरानी चीजें और पुराने विचार नवीकरण कर रहे हैं । नए सिरे से समाज, सत्ता और सामाजिक संरचनाओं को परिभाषित किया जा रहा है। स्वचालितीकरण, उपग्रह, इंटरनेट और कम्प्युटर इस युग की चालकशक्ति हैं। भारत में भविष्य का सारा संचार ... [read more]
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पाकिस्तान में रिहर्सल !!
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हँसता गाता मेरा बचपन
निश्छल मधुर सरस बचपन अब कहाँ से तुझे पाऊँ मैं बचपन [read more]
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फ़ुरसत में .. मुसकराहट बिखेरने की प्रैक्टिस
फ़ुरसत में .. 89  [read more]
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कोलावरी कोलावरी डी "राग बैंड" ------------ ललित शर्मा
प्रकृति में संगीत फ़ैला हुआ है, झरनों की कल कल ध्वनि से लेकर पक्षियों की मधुर चहचहाहट तक, समुद्र की दहाड़ से लेकर भंवरे के गुंजन तक प्रकृति के कण कण में संगीत समाया है। संगीत का अर्थ ही लयबद्धता है। जिस तरह प्रकृति में लय बद्धता है उसी तर ... [read more]
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हमारी "विश्व धरोहरें"
इंसान को अपने प्रादुर्भाव के साथ ही जब भी अपनी जीवन रक्षा और भोजन की समस्याओं से निजात मिली होगी, तभी से उसने सृजन का कार्य भी शुरु कर दिया होगा। समय के साथ-साथ जैसे-जैसे उसमे गुण विकसित होते गये उसके सृजन में भी परिपक्वता आती चली गयी। ... [read more]
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क्या वर्तमान समाज व्यवस्था में देश को एक देश कहा जा सकता है ?
देश का बटवारा निरंतर बढ़ता जा रहा है। यहाँ हम देश के इलाकाई या क्षेत्रीय बटवारे की या कश्मीर व पूर्वोत्तर राज्यों के अलगाव की मांग के रूप में खड़े होते रहे बटवारे की बात नही कर रहे है |इन विवादों , बटवारों के समर्थन व विरोध की चर्चा ... [read more]
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वार्षिक संगीतमाला 2011 - पॉयदान संख्या 18 : तेरी सीमाएँ..जब गुलज़ार और श्रेया ने घोला उदासी का रंग..
रवींद्रनाथ टैगोर के उपन्यास नौका डूबी से प्रेरित हिंदी और बंगाली फिल्म जगत में कई बार फिल्में बन चुकी हैं। इसी सिलसिले को इस बार और आगे बढ़ाया रितुपर्णा घोष ने। बंगाली में ये फिल्म पिछले साल जनवरी महिने में आई। पर हिंदी के दर्शकों के लिए ... [read more]
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चुनाव आयोग ध्यान रखे.
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कृष्ण लीला .......भाग 32
तब नारद जी ने बतलाया देवताओं  के सौ वर्ष बीतने पर कृष्ण सान्निध्य मिलने पर प्रभु चरणों में प्रेम होने पर स्वयं प्रभु अवतार ले  तुम्हारा उद्धार करेंगे  इतना कह नारद जी ने  नर नारायण आश्रम को प्रस्थान किया आश्रम जाने का भी अभिप्रा ... [read more]
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कपास का लगातार घटता उत्पादन
आस्ट्रेलिया, ग्रीस, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका के बाद मुंबई में, इंटरनैशनल कॉटन एडवाइजरी कमेटी वाशिंगटन, इंडियन सोसायटी फोर कॉटन इंप्रूवमेंट और इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च (आइसीएआर) के संयुक्त तत्वावधान में 7 से 11 नवंबर तक चली ... [read more]
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कार्टून:- उफ़्फ वाक़ई बड़ा बुरा हाल है
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ब्लॉगर्स के लिए उपयोगी होगा रचना शिविर --- ललित शर्मा
परिचय का दौर द्वितीय सत्र प्रारंभ होने पर साहित्यकारों का परिचय आरंभ हुआ। अतिथि साहित्यकारों ने भी अपना परिचय दिया, हम तो काऊंटर पर थे इसलिए बिना परिचय के ही रह गए। लोग कहते हैं क्या धरा है नाम में। लेकिन यहाँ आकर मुझे पता चला कि बहुत ... [read more]
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मृत्यु शय्या पर 'अमर' दोस्त
रात के 11 बजे थे. ऑफ़िस से घर लौटा ही था कि फ़ोन की घंटी बजी. देखा बचपन के एक दोस्त का फ़ोन था. पता नहीं क्यों, लेकिन मुझे हमेशा ही असमय आने वाले फ़ोन किसी अनिष्ट की आशंका से झकझोरते हैं. फ़ोन उठाया, मित्र की आवाज़ भारी-भारी थी. [read more]
'अर्श' छूयेंगे या गिरेंगे 'फर्श' पर वाका में ?... Mind Games, 'Sea of Green' & 'Fast and Furious' WACA pitch !!!
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मकर संक्रांति
माघ माह का मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी शनिवार  को मनाया जाएगा। मकर संक्रांति  पर दान का विशेष महत्व है। दान में तिल और गुड़ देना विशेष फल देने वाला माना जाता है। परंपरागत रूप से लोहड़ी पर लोग हवन का आयोजन करते है, जिसमें तिल, घी, मूंगफल ... [read more]
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वही ,कुछ कही ,कुछ अनकही ....
 शाहनवाज़ भाई के कैमरे से एक ठो नयका पोज़ टराई मारते हम  [read more]
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वार्षिक संगीतमाला 2011 - पॉयदान संख्या 19 :तेरी मेरी मेरी तेरी प्रेम कहानी दो लफ़्ज़ों में बयाँ ना हो पाए.....
कभी कभी सीधे सहज बोल भी एक अच्छी धुन पर बेहतरीन गायकों द्वारा गाए जाएँ तो कानों को भले लगते हैं। वार्षिक संगीतमाला की 19 वीं पॉयदान पर भी एक ऐसा ही नग्मा है जिसे गाया है एक बार फिर राहत साहब ने, कोकिल कंठी श्रेया घोषाल के साथ। फिल्म बॉड ... [read more]
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बारूद को निष्क्रिय कर देने वाला एक अद्भुत पौधा 'सदाबहार'
जिसमे सबसे चमत्कृत करने वाली बात है कि यह बारूद जैसे पदार्थ को भी निष्क्रिय करने की क्षमता रखता है। इसी के चलते आज विस्फोटक क्षेत्रों और भंडारण वाली हजारों एकड़ भूमि को उपयोग के लायक बनाया जा सक रहा है. [read more]
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भारतीय कम्युनिस्ट आन्दोलन में उत्तर प्रदेश का योगदान -8
आजादी के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी [read more]
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राष्ट्रीय कुपोषण दिवस!
Cartoon by Kirtish Bhatt (www.bamulahija.com) [read more]
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‘द स्पाई हू केम इन फ्रॉम द कोल्ड’
संदीप मुदगल [read more]
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इंटरव्‍यू
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हिमाचल कल्याण सभा दिल्ली द्वारा पहाड़ी कवि गोष्ठी का आयोजन (प्रैस रिपोर्टर:दीपक शर्मा कुल्लुवी)
हिमाचल कल्याण सभा दिल्ली द्वारा पहाड़ी कवि गोष्ठी का आयोजन [read more]
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रोटी से पोर्न तक
बड़ी खुशी हुई थी यह जानकर कि प्रेस को सुधारक, उद्धारक मिल गया, आत्महत्या कर रहे किसान अब आत्महत्या नहीं करेंगे, क्योंकि किसानों के दुख-तकलीफ की खबरें अब अखबारों में छपने लगेंगी। गरीबों को रोटी दिलवाने के लिए प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्याय ... [read more]
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आंच-104 : ग़ज़ल (जंजाल आते हैं)
आंच-104 [read more]
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कब तक कपास?
इंसान की तीन अहम ज़रूरतों में, मकान से पहले और रोटी के बाद कपड़े की ज़रूरत पर जोर दिया गया है। हम मकान के बिना रहने की कल्पना तो कर सकते हैं लेकिन कपड़े बिना रहने की हमारी सभ्यता में इजाज़त नहीं है। विज्ञान ने चाहे जितनी भी तरक्की कर ली ... [read more]
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1952 के चुनाव प्रचार की एक झलक
देश में कोई भी चुनाव हो बिना धन व साधनों के कोई भी उम्मीदवार चुनाव जितना तो दूर ठीक से प्रचार तक नहीं नहीं कर सकता| आजकल तो गांवों में सरपंचों के चुनावों में भी धन व साधनों की आवश्यकता पड़ती है| [read more]
भारतीय कम्युनिस्ट आन्दोलन में उत्तर प्रदेश का योगदान -7
भगत सिंह से अजय की मुलाकात [read more]
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आविष्कार की मां का नाम आवश्यकता है
इस शीर्षक को जापानियों ने सही ठहराया है, अपने मछली प्रेम से। जापानियों का मछली प्रेम जग जाहिर है। परन्तु वे व्यंजन से ज्यादा उसके ताजेपन को अहमियत देते हैं। परन्तु आज कल प्रदुषण के कारण समुद्री तट के आसपास मछलियों का मिलना लगभग खत्म ... [read more]
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बिग बॉस पांच और नैतिकता
बिग बॉस में होने वाली तमाम नाटकीयता, फिक्सिंग, पक्षपात और आरोपों के बावजूद मुझे यह स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं कि बिग बॉस मेरा एक प्रिय कार्यक्रम रहा था। मुझे पहले के चार बिग बॉस पसंद आए, लेकिन पांचवां बिग बॉस ऐसा था, जिसे देखते हुए ... [read more]
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रामधन एंड मूलधन इन यूपी इलेक्शन पार्ट-२
रामधन मूलधनवा को खोजते हुए भागे जा रहे थे। ए मूलधनवा चलबे न रे। राहुल भइया पांच साल मांगत हवन। कहत रहलन कि बाईस साल सभन के देनी हमन के तब मिलकर सब धान बाईसे पसेरी कई दिहलन सन। सब धान पसेरी हमनी कई दिहनी हो भइया। न रे मूलधन सपा बसपा और भ ... [read more]
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कोयला खादान का एक मजदूर ...
आँखों में तैरती प्रश्नों की भीड़ मुँह में ज़ुबान रखने का अदम्य साहस [read more]
बधाई हो!! सरकार को शर्म आ रही है.
Cartoon by Kirtish Bhatt (www.bamulahija.com) [read more]
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इंतज़ार की सिलाई नही होती
तुम मुझे बातो के बताशे खिलाते हो  अभी आऊँगा थोडी देर मे तुम से ढेर सी बातें करूंगा कह जाते हो और मै आस की ऊँगली थामे खडी रहती हूँ चौखट पर एकटक दरवाज़े पर निगाह टिकाये जेठ की तपती दोपहर मे जानते हो इतनी देर मे एक इंतज़ार की चाद ... [read more]
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"स्मृति शिखर से... 2 : मैं हूँ मोहम्मद सगीर
"स्मृति शिखर से... 2 [read more]
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रायगढ रचना शिविर से लौटकर --- ललित शर्मा
रायपुर स्टेशन पर वन विभाग की जड़ी बूटी दुकान रायगढ में रचना शिविर के आयोजित होने की मेल महीनों पहले प्राप्त हो चुकी थी। मैने भी शामिल होने की ठानी, क्योंकि इससे पहले होने वाले राजनांदगाँव और कोरबा शिविरों में अनुपस्थित रहा था। ठानने के ... [read more]
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सँग चले दोहा-यमक: --संजीव 'सलिल'
सँग चले दोहा-यमक [read more]
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कार्टून :- अय हय पैसा कैसा कैसा
http://kajalkumarcartoons.blogspot.com/ [read more]
भारतीय कम्युनिस्ट आन्दोलन में उत्तर प्रदेश का योगदान -6
कामरेड पी0सी0 जोशी और उत्तर प्रदेश [read more]
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वार्षिक संगीतमाला 2011 - पॉयदान संख्या 20 : इक जुनूँ इक दीवानगी हर तरफ़ हर तरफ़..
गीतमाला की पिछली दो पॉयदानों पर आपने दो अलग मिज़ाज के गीत सुने। जहाँ आईना बदल गया..... के गहरे बोलों में उदासी का रंग था तो वहीं आफ़रीन....... रूमानी रंगों से सराबोर था। वार्षिक संगीतमाला की बीसवीं पॉयदान पर जो गीत आज मैं आपको सुनवाने ज ... [read more]
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हिमाचल कल्याण सभा दिल्ली का वार्षिकोत्सव धूम धाम से मनाया गया (प्रैस रिपोर्टर:दीपक शर्मा कुल्लुवी)
हिमाचल कल्याण सभा दिल्ली का वार्षिकोत्सव धूम धाम से मनाया गया [read more]
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पुराने बरगद से दरकते मुस्लिम नेता
क्या उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति मुस्लिम मतदाता के प्रति अब तक के बने बनाए सभी नज़रिये को बदलने जा रही है? क्या यह पहला चुनाव होगा जो बाबरी ध्वंस,गुजरात दंगे के साये से निकलकर मुसलमान नए सिरे से मतदान करेगा? क्या सच्चर कमेटी और रंगना ... [read more]
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उत्तरप्रदेश से हाथियों का पलायन !
Cartoon by Kirtish Bhatt (www.bamulahija.com) [read more]
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